दिल्ली एनसीआर के छोटे फ्लैट और पीजी कमरों में अक्सर अलग पूजा घर नहीं होता, पर इसका मतलब यह नहीं कि पूजा की जगह छोड़नी पड़े, बस उसका साइज़ बाकी बचे हुए स्पेस के हिसाब से तय करना होता है।
दीवार की जगह बजट से पहले तय करती है
रोहिणी में एक पीजी चलाने वाले मकान मालिक ने पांच कमरों में मंदिर रखने की सोची, पर हर कमरे में सिर्फ एक छोटी सी दीवार खाली थी, बाकी जगह पलंग और अलमारी में घिर चुकी थी। फर्श पर रखा जाने वाला बड़ा मंदिर किसी भी कमरे में फिट नहीं हुआ। दीवार पर टंगने वाला छोटा मंदिर ही असली विकल्प बचा, बजट की वजह से नहीं, सिर्फ इसलिए कि वही दीवार पर फिट होता था।
दीवार पर टंगा मंदिर, फर्श वाला मंदिर या सिर्फ शेल्फ
तीन मुख्य तरीके होते हैं। दीवार पर टंगा मंदिर छोटे फ्लैट में फर्श की जगह बचाता है। फर्श पर रखा मंदिर एक अलग कोना मांगता है और थोड़े बड़े घर में बेहतर बैठता है। लकड़ी की एक साधारण शेल्फ सबसे कम कीमत में आती है और एक कमरे या पीजी सेटअप के लिए अक्सर काफी होती है।
पीजी और हॉस्टल कमरों की असली जरूरत
ज्यादातर पीजी कमरों में साझा शेल्फ या छोटी सी जगह होती है, अलग कोना नहीं। ऐसे में लकड़ी की छोटी पूजा शेल्फ या टेबल पर रखा जाने वाला छोटा मंदिर बिना दीवार में ड्रिल किए फिट हो जाता है, जो किराए के कमरे में जरूरी भी है क्योंकि मकान मालिक अक्सर दीवार में छेद करने की इजाजत नहीं देते।
बजट के हिसाब से ईमानदारी से चुनाव
कम बजट में साधारण लकड़ी फिनिश शेल्फ से लेकर दीवार पर टंगे मंदिर और थोड़े बड़े कैबिनेट-स्टाइल मंदिर तक विकल्प मौजूद हैं। कीमत तय करने में सजावट से ज्यादा साइज़ और मटीरियल का हाथ होता है, इसलिए सही तरीका यह है कि पहले साइज़ तय करें, फिर बजट देखें।
अभी उपलब्ध मंदिर विकल्प देखें और दीवार पर टंगे, शेल्फ और कैबिनेट स्टाइल की कीमत आपस में तुलना करें।
बाकी कमरे का सामान भी लेना हो तो पूरी बजट चेकलिस्ट देखें, जिसमें मंदिर, बेड और स्टोरेज को सही क्रम में रखा गया है।